सोमवार, 18 अक्टूबर 2010

तुम कौन हो...

तुम कौन हो

तुम कौन हो...
क्यों मेरे ख्वाबों में आकर,
मेरी नींद चुरा लेती हो??

जबसे तुमसे नज़रें मिली हैं,
लगता है जैसे एक बेचैनी सी,
दिल में घर कर गयी है....
दिल अपना ना रहा,
आँखें चाहती हैं,
बस तुम्हारा चेहरा सामने हो.

समझ नहीं आता,
क्या यह प्यार है,
जो मुझे तुमसे हुआ है...
तुम बिन जी नही लगता,
तुम सामने हो तो,
खो सा जाता हूँ...
पर इससे ज्यादा भी मैंने,
कुछ खोया है,
मेरी रातों की नींद और चैन,
खोया है...

तुम साथ हो तो लगता है,
ये पल कभी ख़त्म हो...
ये समय रुक जाए,
और इस मुलाक़ात के साथ ही,
सब कुछ ख़त्म हो जाए...
फिर यूँ तन्हाई होगी,
क्योंकि तुम तो हर वक़्त मेरे पास होगी...

क्या यह सचमुच में इश्क है,
जो मुझे तुमसे हो गया है??
मत सताओ मुझे,
मेरी हसरतों ने मुझे,
कहीं का नहीं छोड़ा
हर कदम कदम पर तुम्हारे,
निशाँ खोजता फिरता हूँ...
इस उम्मीद में जीता हूँ,
कि कभी तो वो दिन आएगा,
जब तुम मेरी होगी...और मैं तुम्हारा...

मेरी ख़्वाबों में रहने वाली,
परियों जैसी,
मेरे सपनों की राजकुमारी,
तुम मेरे दिल में बस चुकी हो,
सांस बनकर जिस्म में उतर चुकी हो...
मुझे तुमसे बस इतना कहना है,
तुम जो भी हो,
शायद मेरे लिए ही बनी हो...
मुझे इतना तो बता दो,
कि तुम कौन हो.....


I LOVE YOU...FROM THE DEPTHS OF MY HEART.
P.S.: DEAR FRIENDS, SOMETIMES I TRY MY HAND AT POEM WRITING..THIS IS ONE OF SUCH..PLEASE BE GENEROUS IN COMMENTING.

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