मंगलवार, 31 जुलाई 2018

हो न हो

जी भर के देख लेने दे, आज इस चाँद को,
कल का क्या भरोसा, ये रात हो न हो.

पैमाने न हटा, पीने दे हमें ऐ साक़ी,
ज़िन्दगी का क्या भरोसा, कल हो न हो.

मैं जा नहीं सकता, किसी की राह देखता हूँ,
तक़दीर का क्या भरोसा, फिर ये मुलाकात हो न हो.